चंद्रयान 3 (कविता)

 चांद पर जाने की होड़ लगी है 

कतार दुनिया की बेजोड़ लगी है 

कोई चला गया कोई सोच रहा है 

कोई रास्ते में है बस पहुंच रहा है 


      जब लोग वहां पर पहुंचेंगे विष बूंद बाण से छूटेंगे , नक्षत्र टकराएंगे सब ग्रह परलय मचाएंगे 

       

    तू मानव है बोखलाएगा 

वंहा भी गंद फलाएगा तेरा स्वभाव जिद्दी है हर जगह जंग करता है धरती पे जन्मा है आसमान को तंग करता है 

     

       तू मानव बड़ा अजीब है ये तेरी क्या तहजीब है धरती को लुटा समंदर को लुटा अब आसमान को लूटेगा भर गया तेरा पाप का घड़ा जल्द ही ये फूटेगा 

     

           तब धरती मां सरमाएगी वापस तुझे बुलाएगी प्रकृति का रण होगा जीवन जय या के मरण होगा अब धरती चांद तारे और अनंत गगन तांडव करेंगे जब कोरव मरे थे अब पांडव भी मरेंगे।

लेखक 

राहुल शर्मा 9671747676

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